इस समय भारत की जनता भले ही पेट्रोल की बढ़ती कीमतों से त्राही त्राही कर रही हो लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि एक ऐसा भी देश है जहां आज भी पेट्रोल की कीमत मात्र 71 पैसे प्रति लीटर है। आपको बता दें कि वेनेजुएला पेट्रोलियम एक्सपोर्ट देशों का सदस्य है और इसकी जीडीपी का अधिकतर भाग तेल निर्यात से ही आता है।
वेनेजुएला की एक तिहाई जीडीपी तेल निर्यात पर निर्भर करती है वेनेजुएला तकरीबन 80 फीसदी तेल को निर्यात करता है। दुनिया में पेट्रोल उत्पादन में वेनेजुएला 5वें नंबर पर है। यहां तेल की बहुतायत है और इसकी कोई कमी नहीं है। यहा दुनिया में सबसे सस्ता तेल मिलता है।
इसके बाद नंबर आता है साउदी अरब का जहां पेट्रोल की कीमत 5.35 रुपए प्रति लीटर है। साउदी अरब के पास दुनिया का तेल भंडार का 25 फीसदी रिजर्व भंडार है। यह दुनिया का सबसे ज्यादा पेट्रोल एक्सपोर्ट करने वाला देश है।
वेनेजुएला की एक तिहाई जीडीपी तेल निर्यात पर निर्भर करती है वेनेजुएला तकरीबन 80 फीसदी तेल को निर्यात करता है। दुनिया में पेट्रोल उत्पादन में वेनेजुएला 5वें नंबर पर है। यहां तेल की बहुतायत है और इसकी कोई कमी नहीं है। यहा दुनिया में सबसे सस्ता तेल मिलता है।
इसके बाद नंबर आता है साउदी अरब का जहां पेट्रोल की कीमत 5.35 रुपए प्रति लीटर है। साउदी अरब के पास दुनिया का तेल भंडार का 25 फीसदी रिजर्व भंडार है। यह दुनिया का सबसे ज्यादा पेट्रोल एक्सपोर्ट करने वाला देश है।
क्या अपने देश में पेट्रोल के दाम ५ रु बढ़ाना उचित है ?
पेट्रोल की कीमतों में अभूतपूर्व बढ़ोतरी महंगाई बढ़ने का एक सिग्नल है। सरकार ने इसकी कीमतें बढ़ाकर न केवल एक जनाक्रोश पैदा किया है बल्कि आगे और महंगाई बढ़ाने का रास्ता तैयार कर दिया है। इसके बाद अब बाज़ार में बहुत सी चीजों के दाम बढ़ जाएंगे और उन शहरों में जहां सीएनजी नहीं है और नगरीय परिवहन पेट्रोल पर आधारित है, ट्रांसपोर्ट की दरें बढ़ जाएंगी। इसके अलावा खाने-पीने की वस्तुओं की मंहगाई झेल रहे लोगों को और परेशानी होगी क्योंकि उनका बजट गड़बड़ा जाएगा।
सरकार ने कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी का हवाला देते हुए 12 महीनों में 9 बार पेट्रोल के दाम बढ़ाए। इसका असर महंगाई के इंडेक्स पर भी पड़ा है। भारत में मुद्रास्फीति बढ़ने का एक कारण यह भी रहा है। इसका असर अगले हफ्ते आने वाले महंगाई के आंकड़ों पर भी पड़ेगा और उसके बाद रिजर्व बैंक फिर ब्याज दरें बढ़ाएगा जिससे औद्योगिक सामान और महंगे हो जाएंगे। यानी यह एक दुष्चक्र होगा।भारत में सामानों का ढुलाई ट्रकों से होती है जो डीजल से चलते हैं पेट्रोल से नहीं। लेकिन इस बढ़ोतरी का असर उनकी कीमतों पर भी पड़ेगा। इसका कारण यह है कि उत्पादन करने वाली कंपनियां इस समय कच्चे माल की महंगाई से जूझ रही हैं और पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी से उनकी लागत में वृद्धि होती ही है। इससे उनका खर्च बढ़ता है और ज़ाहिर है कि वे बढञी हुई कीमतें जनता को थमा देंगी।
भारत में आज भी सार्वजनिक परिवहन के साधन बहुत कम हैं और इसलिए लोग मोटर साइकिलों से लेकर कारों तक का इस्तेमाल अपने कार्यस्थलों पर जाने के लिए करते हैं। पांच रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी उनके लिए भारी है क्योंकि इसका सीधा असर उनके बजट पर पड़ेगा। उनकी क्रय शक्ति घटेगी और वह दूसरी चीजों के खर्च में कटौती करेंगे। इससे औद्योगिक उत्पादन पर बुरा असर पड़ेगा।
अगर सरकार चाहती तो इसके बदले कोई और रास्ता अख्तियार कर सकती थी। इसकी भरपाई लग्जरी टैक्स लगाकर कर सकती थी। इसके अलावा सरकार पेट्रोल पर लगे टैक्स घटा सकती थी जो इस समय कम से कम 30 रुपए है। पेट्रोल के दाम बढ़ाना गलत इसलिए भी है कि इसका इस्तेमाल निम्न मध्यम वर्ग के लोग भी करते हैं। पैसे वाले डीजल कारों में चलते हैं और उन्हें अब फायदा हो रहा है।
ब्रेंट क्रूड के दाम हाल ही में घटे हैं। सच तो यह है कि पेट्रोल के दाम हमारे पड़ोसी देशों में हम से कम हैं। तेल कंपनियां सरकार के इशारे पर काम करती हैं और दाम बढ़ाती चली जाती हैं। पेट्रोल के बारे में सरकार में कोई मूल चिंतन नहीं है। सरकार ऊर्जा के विकल्पों पर ध्यान नहीं दे रही है।
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